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कोरबा : ननिहाल आए बागेश्वर सरकार” उरगा-छुरी में ऐतिहासिक स्वागत, ढपढप में उमड़ा आस्था का महासैलाब।

कोरबा (न्यूज उड़ान )छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज के आगमन ने पूरे कोरबा अंचल को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।

रायगढ़ से कोरबा की ओर उनके आगमन के साथ ही श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

उरगा और छुरी में उनका भव्य, ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्वागत हुआ, वहीं बाकीमोगरा क्षेत्र के ग्राम ढपढप में शुरू हुई दिव्य श्री हनुमंत कथा के पहले ही दिन आस्था का महासैलाब उमड़ पड़ा।

उरगा-छुरी में गूंजे जयकारे, दिखा जनआस्था का विराट रूप।

महाराज श्री के उरगा पहुंचते ही चौक-चौराहों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

भगवा ध्वज, पुष्पवर्षा, जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से पूरा वातावरण धर्ममय हो उठा।

छुरी में भी इसी उत्साह और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया गया। दोनों स्थानों पर उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ में बागेश्वर धाम सरकार के प्रति अपार आस्था और सम्मान है।

“छत्तीसगढ़ है ननिहाल” — भावनाओं से भरा आत्मीय स्वागत।

पूरे आयोजन के दौरान एक भाव बार-बार उभरकर सामने आया“छत्तीसगढ़, बागेश्वर धाम सरकार का ननिहाल है।”

मामा-भांजे के रिश्ते जैसी आत्मीयता, अपनापन और स्नेह के साथ श्रद्धालुओं ने महाराज श्री का स्वागत किया।

यह केवल एक धार्मिक आगमन नहीं, बल्कि अपने ही घर लौटने जैसा भावनात्मक मिलन बन गया।

ढपढप में हनुमंत कथा: पहले दिन ही उमड़ा जनसागर

बाकीमोगरा क्षेत्र के ग्राम ढपढप में जैसे ही हनुमंत कथा का शुभारंभ हुआ, कथा स्थल श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। पहले ही दिन इतनी विशाल भीड़ उमड़ी कि पूरा परिसर “जय श्रीराम” और “जय हनुमान” के उद्घोष से गूंज उठा।

महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे—हर वर्ग के लोग बड़ी संख्या में कथा श्रवण के लिए पहुंचे। दृश्य ऐसा था मानो पूरा क्षेत्र भक्ति के महासागर में डूब गया हो।

ओजस्वी प्रवचन में धर्म, संस्कार और एकता का संदेश

कथा के प्रथम दिवस पर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने अपने प्रभावशाली प्रवचन में हनुमानजी की महिमा, भक्ति की शक्ति, सनातन धर्म की महानता, पारिवारिक संस्कार, राष्ट्र चेतना और हिंदू समाज की एकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उनकी वाणी में जहां भक्ति की मधुरता थी, वहीं धर्म जागरण की तेजस्विता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। श्रद्धालु पूरे समय मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे।

भव्य व्यवस्था: दिव्य धाम में बदला ढपढप

आयोजन समिति द्वारा कथा स्थल को भव्य धार्मिक स्वरूप दिया गया है। भगवा ध्वजों से सुसज्जित परिसर, विशाल मंच, सुसंगठित पंडाल और भक्तिमय वातावरण ने पूरे क्षेत्र को दिव्य धाम में परिवर्तित कर दिया है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा, बैठने की व्यापक व्यवस्था, विश्राम स्थल सहित सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, जिससे आयोजन अनुशासन और सेवा भाव के साथ संचालित हो रहा है।

आस्था, संस्कृति और एकता का ऐतिहासिक उत्सव

उरगा और छुरी में हुए ऐतिहासिक स्वागत तथा ढपढप में कथा के पहले दिन उमड़ी अभूतपूर्व भीड़ ने यह साबित कर दिया है ।

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