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: जो न कर पाए कश्मीर में भोले बाबा अमर नाथ बर्फानी के दर्शन, वो करें बाबा बुड्ढा अमरनाथ चट्टानी के दर्शन।

Vivek Sahu

Fri, Jul 25, 2025
जम्मू/राजौरी/ न्यूज उड़ान जो भोले शंकर का प्यारा भक्तजन कश्मीर में अमरनाथ यात्रा में शामिल होकर बाबा बर्फानी यानी हिम से बना पवित्र शिवलिंग के दर्शन नहीं कर पाया हो और भोले शंकर के दर्शन की दिली चाहत रखता हो तो उसे मायूस होने की जरूरत नहीं।   वह जम्मू संभाग के सीमावर्ती जिला पुंछ में पहुंच श्री बाबा बुड्ढा अमरनाथ की यात्रा भी कर अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकता है।   श्री बुड्ढा अमरनाथ यात्रा की मान्यता अमरनाथ यात्रा की तरह ही है। वैसे भी बुजुर्ग, बीमार, दिव्यांग लोग अमरनाथ यात्रा में कठिन चढ़ाई नहीं कर पाते हैं वह जम्मू संभाग के पुंछ जिले में बुड्ढा अमरनाथ के स्थान पर माथा टेकने जाते हैं।   श्रावण मास में किसी भी समय बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्रा की जा सकती है। पुंछ जिले में बाबा बुड्ढा अमरनाथ स्थल ( बाबा चट्टानी, यानी सफेद चट्टान से बना शिवलिंग) की उतनी ही महत्ता है जितनी कश्मीर में अमरनाथ यात्रा की।   बाबा बुड्ढा अमरनाथ का पवित्र मंदिर पाकिस्तानी क्षेत्र से तीन ओर से घिरी सीमावर्ती भारतीय क्षेत्र पुंछ घाटी के उत्तरी भाग में पुंछ सिटी से 23 किमी की दूरी पर तहसील मंडी के लोरन घाटी पुलस्ती नदी के किनारे गांव राजपुरा में स्थित है। और सांप्रदायिक सौहार्द की कथा भी सुनाता है।   यह जगह जम्मू से करीब 235 किलोमीटर दूर है। खासकर वार्षिक यात्रा में श्रद्धालु देश के कोने-कोने से उत्साह के साथ भोले बाबा के दर्शन करने आते हैं।   आश्चर्य की बात है कि हिन्दुओं का धार्मिक स्थल होने के बावजूद इसके आसपास कोई हिन्दू घर नहीं है।   यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का मुस्लिम समुदाय के लोग भी स्वागत के लिए खड़े रहते हैं। मंदिर की देखरेख सेना व बीएसएफ के जवान करते हैं।   भारत-पाकिस्तान बटवारे से पहले यहाँ पाकिस्तान तथा पाक अधिकृत कश्मीर से आने वालों का ताँता भी लगा रहता था जो पुंछ नगर से सिर्फ तीन किमी की दूरी पर ही है।   वैसे बाबा के दर्शन को 12 माह दरवाजे खुले रहते हैं। खाने पीने, रहने के साथ-साथ सुरक्षा की पूरी सुविधा उपलब्ध दी जाती है। कैसे पहुंचें श्री बुड्ढा अमरनाथजी के दर्शन करने :- जहाँ तक के बाबा के दर्शन के लिए पैदल यात्रा भी नहीं करनी पड़ती है।   बाबा चट्टानी के दर्शन के लिए जम्मू-पुंछ नेशनल हाईवे 144ए से सुंदरबनी, नौशहरा, राजौरी, बिजी, सुरनकोट , पुंछ बाजार से नौ किलोमीटर पहले चंडक होते हुए मंडी पहुंचा जा सकता है। अखनूर पुंछ नेशनल हाईवे 144ए का चौड़ीकरण का काम लापरवाही से चल रहा है जिसके चलते कईं जगह भूस्खलन व श्रद्धालुओं के साथ अन्यों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है। बता दें कि पूरे श्रावण महीने में भक्तजनों की भीड़ यहां रहती है। मात्र हिंदू ही नहीं हर समुदाय से स्थानीय लोग व पर्यटक भी करते हैं भोले बाबा के दर्शन।   किसी भी समय यात्री और निजी वाहन लेकर यहां पहुंचा सकता है। जम्मू से सप्ताह भर चलने वाली यात्रा बजरंग दल द्वारा संचालित होती है।   इस बार वार्षिक यात्रा का पहला जत्था 27 जुलाई को जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से कड़ी सुरक्षा के बीच बाबा के दर्शन के लिए रवाना होगा सीमावर्ती जिला राजौरी में भव्य स्वागत व पूजार्चना के साथ झंडी दिखाकर राजौरी से पुंछ जिले में स्थित बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना किया जायेगा। यह यात्रा रक्षाबंधन तक चलेगी।   आपको यह भी बताते चले की देश के लोगों को जोड़ने के लिए बजरंग दल ने अपने बलबूते पर आतंक के दौर में 2005 में बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्रा को शुरू करवाया था। वार्षिक यात्रा में भाग लेने बाले श्रद्धालुओं का जम्मू से लेकर राजौरी-पुंछ में जगह-जगह जोरदार पुष्पवर्षा व ढोलथाप के साथ स्वागत किया जाता है। भगवती नगर जम्मू निकलने बाला यात्री जत्था सुंदरबनी में पहुंच जलपान करता है और आगे बढ़ते हुए राजौरी यात्रा मैदान में पहुंच विश्राम करने के साथ दोपहर का लंगर ग्रहण करता है। और आगे ( जिला पुंछ)बीजी-सुरनकोट क्रास करते हुए रात को सीधा पुंछ आखाड़ा ( पुंछ नगर ) में पहुंच रात्रि लंगर ( भोजन) ग्रहण कर विश्राम करते हैं और अगली सुबह कड़ी सुरक्षा के साथ बुड्ढा अमरनाथ के दर्शन के लिए यात्रा रवाना होती हैं। प्रशासन द्वारा यात्रा में पंजीकृत वाहनों व यात्रियों का एक-एक का हिसाब रखा जाता है। तीसरी आंख से दुश्मन की निगरानी की जाती है। इस मंदिर तथा वार्षिक उत्सव के साथ कई कथाएं जुड़ी हुई हैं।   अन्य शिव मंदिरों से यह अलग है कहा जाता है कि भगवान शंकर द्वारा सुनाई जाने वाली अमर कथा की शुरुआत यहीं से हुई थी। मंदिर के एक ओर लोरन दरिया बहता है जिसे पुलस्त्य दरिया कहा जाता है। उसका पानी बर्फ से अधिक ठंडक लिए रहता है। पुंछ कस्बे का पहला नाम पुलस्त्य ही था। कई कहानियां प्रचलितः- कहते हैं कि पुलत्सय ऋषि जोकि हर साल कश्मीर में अमरनाथ यात्रा पर जाते थे। एक बार वह नहीं जा पाए। वह उदास रहने लगे।   कहते हैं कि बाबा अमरनाथ (भगवान शिव) ने पुलस्ती नदी किनारे राजपुरा में ही दर्शन दिए थे। इसी तरह सुंदर लोरन घाटी की महारानी चंद्रिका की कहानी भी जुड़ी हुई है। एक बार प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण वह कश्मीर में बाबा अमरनाथ यात्रा नहीं कर पाई तो उदास रहने लगी। तभी बूढ़ा साधु प्रकट हुआ और उसने महारानी से कहा कि वह उनकी मनोकामना को पूरी कराएगा। उसने महारानी को निश्चित जगह पर पूजा अर्चना करने के लिए कहा। महारानी चंद्रिका भी बताए गए स्थल पर पूजा अर्चना में लीन हो गई।   कहते हैं कि बूढ़े साधू बाबा जो वहां खड़े थे, अचानक धरती में लीन हो गए। बहुत खोजने पर भी वह नहीं मिले तो महारानी को विश्वास हो गया कि यह कोई और नहीं बल्कि बूढ़े बाबा के वेश में स्वयं बाबा अमरनाथ थे। इस स्थल का नाम बाबा बुड्ढा अमरनाथ हो गया। बाद में उक्त स्थल की खुदाई की गई तो श्वेत चट्टान प्रकट हुई। इसलिए इन्हें चट्टानी वाले बाबा के नाम से जाना जाने लगा।   अब यहां मंदिर भी है जहां सफेद मरमरी चट्टान से बना शिवलिंग है जोकि बर्फ की तरह चमकता है।   एक अन्य कथा के अनुसार, रावण के दादा श्री पुलस्तया जिन्होंने पुंछ को बसाया था ने लोरन दरिया के किनारे भगवान शिव की पूजा कर पा लिया था। तभी से यह स्थान बुड्ढा अमरनाथ तथा लोरन दरिया पुलस्तया दरिया के नाम से जाना जाता है। और यह स्थान भारत-पाक नियंत्रण रेखा के अंतर्गत भारत के जम्मू संभाग में पाया जाता है। भक्तजनों की जानकारी के लिए बतादें कि पुंछ के लोरन बटलकोट गांव में लिंक सड़क मार्ग के पास पहाड़ी के ऊपर साईं इलाही बक्श मजार के सामने शीश नाग जिसकी आबाजाही रहती थी और साईं ने उसे काबू कर दिया था जो आज भी प्राकृतिक सफेद चट्टान में दर्शन देता है। इसके नीचे नाले के पास बड़े तख्त चट्टान के ऊपर वर्षों से उर्दू में कुछ लिख रखा है जो मेरी समझ से बाहर था। और जानकारी नहीं मिल सकी। जिला राजौरी के तहसील दरहाल के उजान क्षेत्र की नदी में देवी देवताओं की मूर्तियां वर्ष के अधिक समय नदी के नीचे रहती हैं और गर्मी के दिनों में दिखाई देती हैं जब जलस्तर में गिरावट आती है जिसमें बाबा भोलेनाथ जी की मूर्ति नजर आती है। राजौरी के थन्नामंडी बाजार के पास भोले नाथ शिव के तीन मंदिर हैं जो विकास की राह देख रहे हैं उसकी रेखदेख करने बाला कोई नहीं है जो कईं वर्षों से विरान पड़े हुए हैं। इसके अलावा अन्य शिव परिवार गुफाएं भी हैं। इतिहासिक जानकारी जुटाकर यात्रा को इससे जोड़ा जा सकता है। वहीं राजौरी से करीब 66 किलोमीटर नियंत्रण रेखा के साथ वीरभद्रेश्वर मंदिर वह भी आस्था का केंद्र है। यात्रा को इससे भी जोड़ा जा सकता है। वहीं बुड्ढा अमरनाथ जी की वार्षिक यात्रा को लेकर व्यस्था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।   ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकी खतरे के साये में इस बार पूंछ जिले की सबसे बड़ी वार्षिक धार्मिक यात्रा श्री बूढ़ा अमरनाथ जी की यात्रा 27 जुलाई से शुरू होने जा रही है। यह यात्रा सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान की ओर से हुई भारी गोलाबारी में सिविलियन इलाकों को निशाना बनाया गया था। ऐसे में इस बार यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों द्वारा व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। रिपोर्ट...अनिल भारद्वाज

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