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: जन्मों संगवारी मन ल छत्तीसगढ़ लोक आस्था दान अउ मांग के परब छेरछेरा पुन्नी के टुकनी- टुकनी, चूंडी-चूंडी अऊ गाड़ा-गाड़ा बधाई हे....छेरछेरा

Vivek Sahu

Mon, Jan 13, 2025
जन्मों संगवारी मन ल छत्तीसगढ़ लोक आस्था दान अउ मांग के परब छेरछेरा पुन्नी के टुकनी- टुकनी, चूंडी-चूंडी अऊ गाड़ा-गाड़ा बधाई हे....छेरछेरा बड़े बिहनिये संगी जहूरिया, झोला धरे आये हें । कुलकित दिखय चेहरा मुंदरा, जमें झन हर्षाये हें । छेरछेरा संग जोहार पलगी, करत सोर मचाये हें । ढोल मंजिरा डंडा नाचत, खोल गली म संकलाये हें । झंगलू मंगलू धान के बोरा ल, अलगाये हें । टुकनी टुकनी धान ल, बबा ह मंगाये हे । घेरी घ झोंकावय टुरा मन, डोकरी दाई करलाये हे । नान्हे नान्हे नोनी मन, घलो टोली म आये हें । छेरछेरा के नारा ल, *घरो घर बगराये हें । छत्तीगढ़ ह आज संगी हो, अपन रूप म आये हे । कोन गरिब के कोन गौटिया, जम्मों भेद मिटाये हे । छत्तीसगढ़ के मियारी तिहार ल, घरो घर मनाये हे । घरो घर मनाये हे । रचनाकार- प्रहलाद चन्द्र लखलिया

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