कोरबा : सरदार पटेल जयंती पर सामाजिक एकता का संदेश, महापौर संजू देवी राजपूत ने किया माल्यार्पण; चीकू का पौधा रोपकर दिया पर्यावरण
Vivek Sahu
Sat, Oct 31, 2026
कोरबा (दैनिक न्यूज उड़ान) तुलसी नगर स्थित स्मृति संस्थान में कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति का आयोजन, महापुरुष के आदर्शों के साथ सामाजिक समरसता, संगठन की मजबूती और प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प।
कोरबा (दैनिक न्यूज उड़ान) लौह पुरुष भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर कोरबा के तुलसी नगर चौक स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति संस्थान में श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक एकता का प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला।
कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति द्वारा आयोजित जयंती समारोह में समाज के वरिष्ठजनों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित नगर निगम कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर लौह पुरुष को नमन किया।
इसके बाद उन्होंने समाज के उपस्थित लोगों से मुलाकात की और उनके साथ आत्मीय संवाद किया। समारोह में देवेंद्र पांडे भी शामिल हुए।
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि जयंती समारोह को केवल माल्यार्पण और औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा गया।
महापौर संजू देवी राजपूत ने स्मृति संस्थान परिसर में चीकू का पौधा रोपित किया। वहीं देवेंद्र पांडे ने भी एक पौधा लगाकर हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया।
इस पहल के माध्यम से उपस्थित लोगों को यह प्रेरणा दी गई कि महापुरुषों की जयंती पर उनके विचारों को याद करने के साथ-साथ समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करना चाहिए।
माल्यार्पण के साथ समाजजनों से संवाद, सामाजिक एकता पर रहा जोर।
महापौर संजू देवी राजपूत ने माल्यार्पण के पश्चात समिति के पदाधिकारियों एवं समाज के लोगों से मुलाकात की।
इस दौरान सामाजिक गतिविधियों, संगठन की भूमिका और समाज की एकजुटता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
समारोह में समाज के लोगों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, आपसी सहयोग, संस्कार और संगठित प्रयासों में निहित होती है।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन इस बात का ऐतिहासिक उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और सामूहिक नेतृत्व से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
स्वतंत्रता के बाद देश की सैकड़ों रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका ने उन्हें आधुनिक भारत के एकीकरण का प्रमुख शिल्पकार बनाया।
उनका व्यक्तित्व केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं था, बल्कि संगठन क्षमता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा भी देता है।
समाज की मजबूती में शिक्षा, संस्कार और संगठन की अहम भूमिका।
समारोह का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी रहा कि समाज की उन्नति केवल आयोजनों और उत्सवों से नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार, आपसी सहयोग, युवाओं की भागीदारी और जरूरतमंदों के साथ खड़े होने की भावना से होती है।
महापुरुषों के नाम पर स्थापित स्मृति संस्थान तभी सार्थक बनते हैं, जब वे आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों और आदर्शों से जोड़ने का माध्यम बनें।
आज के समय में सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। समाज में व्याप्त आपसी दूरियों को समाप्त करना, नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराना, शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना ऐसे कार्य हैं, जिनसे किसी भी समाज की पहचान और प्रतिष्ठा आगे बढ़ती है।
सरदार पटेल की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर बना।
पौधारोपण से जुड़ा राष्ट्रनिर्माण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
चीकू सहित अन्य पौधों का रोपण समारोह का विशेष आकर्षण रहा।
सरदार पटेल ने जिस मजबूत और एकजुट भारत की कल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसी राष्ट्र की भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण भी जरूरी है।
पौधारोपण के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल वर्तमान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में भी प्रयास होने चाहिए। पौधा लगाना तभी सार्थक होगा, जब उसकी नियमित देखभाल कर उसे वृक्ष बनाया जाए।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में नगर निगम कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति के अध्यक्ष रामकुमार वर्मा, उपाध्यक्ष एवं पार्षद राकेश वर्मा, सचिव अश्वनी चंद्रा, कोषाध्यक्ष मोहन पटेल, उपकोषाध्यक्ष पवन सिन्हा, सहसचिव रामधन राजवाड़े, सदस्य सीताराम कश्यप, बलीराम राजवाड़े, पुन्नीलाल राजवाड़े, शिवचरण कश्यप, वार्ड पार्षद मथुरा चंद्रा, सुशील वर्मा, सुदेश चंद्रा, सुधीर वर्मा, महेंद्र कौशिक, संजय राजवाड़े, रंजना राजवाड़े, एनपी कौशिक, शांति बाई चंद्रा, सरिता चंद्रा, हेमलता चंद्रा, पूनम चंद्रा, लक्ष्मी देवी कौशिक, रीमा वर्मा, खुशबू वर्मा, शोभा चंद्रा, दिनेश राजवाड़े, चंदन प्रसाद राजवाड़े, नरेंद्र कौशिक, जगमोहन राजवाड़े, महेंद्र राजवाड़े, देवेंद्र राजवाड़े, देवेंद्र पांडे, शशि वर्मा, रविंद्र कुमार राजवाड़े एवं उमा राजवाड़े सहित समाज के अनेक वरिष्ठजन, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर आयोजित यह समारोह श्रद्धांजलि, सामाजिक संवाद और पर्यावरण संरक्षण की तीन महत्वपूर्ण भावनाओं को एक सूत्र में पिरोने वाला आयोजन रहा।
प्रतिमा पर माल्यार्पण ने इतिहास और राष्ट्रनिर्माण के योगदान का स्मरण कराया, समाजजनों से संवाद ने संगठनात्मक एकता का संदेश दिया और पौधारोपण ने भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प दोहराया।
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में एकता मजबूत हो, नई पीढ़ी संस्कारों से जुड़े और राष्ट्रहित के साथ प्रकृति संरक्षण को भी जीवन का हिस्सा बनाया जाए।
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