जम्मू/राजौरी : बीजीएसबीयू में माइक्रोसॉफ्ट एज्योर एआई पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू।
Vivek Sahu
Tue, Nov 3, 2026
जम्मू-राजौरी: दैनिक न्यूज उड़ान
बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय (बीजीएसबीयू) राजौरी में सोमवार को माइक्रोसॉफ्ट एज्योर एआई एप्स एंड एजेंट डेवलपर विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) शुरू हुआ।
यह कार्यक्रम 2 से 6 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की ओर से आईसीटी अकादमी, तमिलनाडु के सहयोग तथा भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की साझेदारी में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान एवं व्यावसायिक कौशल प्रदान करना है।
इसके माध्यम से प्रतिभागियों को माइक्रोसॉफ्ट एज्योर तकनीक का इस्तेमाल करके एआई आधारित एप्लीकेशन और इंटेलिजेंट एजेंट विकसित करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस पहल का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जावेद इकबाल ने उच्च शिक्षा में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रमों से नवाचार, विभिन्न विषयों के बीच आपसी सहयोग तथा शिक्षण एवं शोध कार्यों में एआई तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार रवि के. सिहाग (आईएएस) ने बदलती तकनीक के अनुरूप शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण और शैक्षणिक उत्कृष्टता को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डीन अकादमिक अफेयर्स प्रोफेसर टीटी जेवियर ने शिक्षण एवं शोध कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई उच्च शिक्षा में नवाचार के नए अवसर प्रदान कर सकता है।
इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में मुजफ्फर बशीर शाह मुख्य रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रशिक्षण देंगे।
वह डेटा साइंस और एआई/एमएल के क्षेत्र में 11 वर्षों से अधिक का औद्योगिक अनुभव रखते हैं। उन्होंने कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, क्वारा एआई टेक और सिम्पलीफाई सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस (डेटोइन) जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों के साथ काम किया है।
वर्तमान में वह कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस में सीनियर मशीन लर्निंग इंजीनियर एवं डेटा साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत हैं।
उनकी विशेषज्ञता जनरेटिव एआई, लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम), नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, डीप लर्निंग, प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और क्लाउड आधारित एआई समाधानों में है।
उन्हें इंटेलिजेंट असिस्टेंट और चैटबॉट सहित आधुनिक एआई एप्लीकेशन तैयार करने एवं लागू करने का व्यापक अनुभव है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को माइक्रोसॉफ्ट एज्योर एआई तकनीक के व्यावहारिक उपयोग, इंटेलिजेंट ऑटोमेशन, एआई एप्लीकेशन डेवलपमेंट और क्लाउड आधारित समाधानों की जानकारी दी जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस पहल से शिक्षकों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ शिक्षण, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाओं को अपनाने में मदद मिलेगी।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की ओर से शिक्षकों की क्षमता निर्माण, उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने तथा निरंतर व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
रिपोर्ट....अनिल भारद्वाज
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